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आतंकवाद का रास्ता छोड़ सेना में शामिल हुआ था ये जवान, शहीद होने पर सरकार से मिला ये बड़ा सम्मान !

आतंकवाद दुनिया पर लगा एक ऐसा कलंक है जिसको खत्म करने के लिए बड़े से बड़े देश ने अपना जोर आजमा लिया, लेकिन फिर भी अभी तक कोई भी इसका खात्मा नहीं कर पाया है. वर्ल्ड वॉर के दौरान कुछ देशों ने आतंकवाद को जन्म दिया था, लेकिन अब ये वो नासूर बन गया है जो रह-रह कर दर्द देता है. एक आतंकी से भारतीय सेना में शामिल हुए एक सैनिक का हैरतअंगेज मामला सुनने को मिला है.

यह है पूरा मामला

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जब कोई इंसान कुछ करने की ठान ले तो भले ही लाख मुश्किलें सामने आये हैं वह अपने लक्ष्य तक पहुंच ही जाता है. ऐसा ही कुछ हमारे एक सैनिक ने किया था. यर सैनिक कभी कश्मीर घाटी में आतंकी हुआ करता था लेकिन उसने आतंक का साथ देने की बजाय भारतीय सेना में शामिल होकर देश की सेवा करना बेहतर समझा. लेकिन आतंकियों का सामना करने के दौरान इस सैनिक ने अपनी जान गवा दी.

ये है वो वीर जवान

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जानकारी के लिए आपको बता दें, कि हम जिस सैनिक की बात कर रहे हैं वो कोई और नहीं बल्कि शहीद लांस नायक नजीर अहमद वानी हैं. इन्होने आतंकी राह छोड़ सेना के सामने आत्मसमर्पण किया था. जब बटागुंड गांव में भारी हथियारों से लैस हिज्ब उल और लश्कर तैयबा के आतंकियों की सूचना मिली कि वह भारत पर आतंकी हमले की साजिश रच रहे हैं तो वानी उनका खात्मा करने के लिए चल पड़े. 

रक्षा करते हुए शहीद

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सूत्रों की माने तो वानी आतंकियों को मारने के लिए उस घर की ओर बढ़े लेकिन आतंकियों ने घर के चारो तरफ लैंड माइंस बिछा रखे थे. देर तक दोनों पक्ष की तरफ से गोलीबारी चली और आतंकियों को सामना करते हुए वानी शहीद हो गये. बताया ये भी जा रहा है कि बुरी तरह घायल होने के बाद भी उन्होंने आतंकियों का सामना किया. उनकी शहादत को हमेशा याद रखा जायेगा. वानी को सर्वोच्च सेना पदक अशोक चक्र से सम्मानित किया गया है.

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