आरबीआई के नोटबंदी को लेकर दिए गए बड़े ब्यान के बाद लोकसभा चुनाव से पहले ही घिर सकती है मोदी सरकार !


नोटबंदी की वो यादें अभी तक लोगों के मन में तरो ताजा है. जब भी किसी के मुहं से नोटबंदी का नाम सामने आता है तो लोग भाजपा पर ऊँगली उठाने से पहले एक बार भी नहीं सोचते हैं. कई लोग उस दौरान लाइन में पैसे बदलवाते हुए ही मर गये, जबकि कई व्यापारियों को भारी नुकसान उठाना पड़ा. नोटबंदी के दौरान जनता को मिले जख्म अभी भी हरे हैं. लेकिन हालहि में एक और हैरान करने वाला खुलासा हुआ है जो भाजपा के लिए संकट खड़ा कर सकता है.

यह है पूरा मामला

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दरअसल, नवंबर 2016 में जब नोटबंदी हुई थी तो पूरे देश में लगभग एक सप्ताह तक अफरा तफरी का माहौल साफ़ देखने को मिल रहा था. कई लोगों को नौकरी से सिर्फ इसलिए निकल दिया गया था क्योंकि मालिक उनको सैलरी नहीं दे पा रहे थे. मोदी ने बिना आरबीआई की सहमति के नोटबंदी की घोषणा कर दी थी ताकि काले धन पर लगाम कसी जा सके, लेकिन ऐसा कुछ ज्यादा देखने को नहीं मिला.

आरबीआई के निदेशकों का बयान

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जानकारी के लिए आपको बता दें, कि आरबीआई के निदेशकों से जब नोटबंदी के बारे में पूछा गया तो उनका कहना था कि नोटबंदी की घोषणा होने से ढाई घंटे पहले उनकी मोदी के साथ बैठक हुई. उन्होंने सरकार को सुझाव भी दिया था कि काला धन लोगों के पास पैसों से ज्यादा प्रॉपर्टी, सोने के रूप में ज्यादा है लेकिन सरकार ने उनकी बात को नजरंदाज करके बिना उनकी सहमती के नोटबंदी की घोषणा कर दी.

आम चुनाव में हो सकता है भरी नुकसान

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अगर सूत्रों की माने तो भाजपा के पिछले साढ़े चार साल के कार्यकाल को लेकर जनता सवाल जरुर उठाये. इन सवालों में भाजपा नोटबंदी वाली योजना पर घिर सकती है. आई टी आई के जरिये हुए खुलासे के बाद विपक्ष नोटबंदी को बड़ा मुद्दा बना रही है, क्योंकि नोटबंदी के बाद देश की विकास दर और कमजोर हो गई है. इतना ही नहीं बेरोजगारी ने पिछले 46 साल का रिकॉर्ड भी तोड़ा है.

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