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सीबीआई के इस खुलासे ने खोल दी पीएम मोदी की ईमानदारी की पोल, सुनकर मचा तहलका

सीबीआई चीफ आलोक वर्मा को 23 सितम्बर की रात को ही मोदी सरकार ने छुट्टी पर भेज दिया हैं. इसके बाद से ही सियासत में सुगबुगाहत तेज हो गई हैं. अब इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट तक पहुँच चुकी हैं. बता दे कि आलोक वर्मा ने कोर्ट में जो कुछ भी कहा हैं, उससे साफ़ हो गया हैं की किस तरह मोदी सरकार CBI के उपर दबाव बना रही थी.

आलोक वर्मा ने दायर की याचिका source

आपकी जानकारी के लिए बता दे कि आलोक वर्मा द्वरा दायर की गयी याचिका में आलोक ने कोर्ट से कहा कि मौजूदा हालत में सीबीआई को ठोस कदम उठाने की ज़रूरत थी मगर मोदी सरकार ऐसा करने से रोक रही थी. इतना ही नहीं आगे कहा कि पीएम मोदी द्वारा नियुक्त राकेश अस्थाना पर एक्शन नहीं लेने के लिए भी दबाव बनाया जा रहा था. मोदी के उपर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि मोदी सरकार सीबीआई के कामकाज में हस्तक्षेप करती है.

वर्मा ने कहा- यह कदम सीबीआई की स्वतंत्रता में दखलsource

आपको बता दे की वर्मा के मुताबिक केंद्र सरकार एवं CVC द्वरा लिए गये निर्णय अवेध हैं. आगे कहा की यह पूरी तरह प्रमुख जांच एजेंसी की स्वायत्तता में हस्तक्षेप है. सरकार को CBI के काम में दखल देना का कोई हक़ नहीं हैं. सीबीआई डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग के अधिकार क्षेत्र में आता हैं. इस क्षेत्र में केंद्र सरकार किसी प्रकार की दखल नहीं दे सकती हैं.source

आपको बता दे कि इस मामले की अगली सुनवाई अब  26 अक्टूबर को होने वाली हैं. वहीँ इस मामले पर केंद्र सरकार ने अपनी सफाई में कहा हैं कि यह फैसला CVC और केंद्र सरकार की सहमती के बाद लिया गया हैं.

सीबीआई में पहली बार दो बड़े अफसरों के बीच लड़ाईsource

जानकारी के लिए बता दे कि वर्मा ने अपने याचिका में में नियमों को याद दिलाते हुए मोदी पर प्रहार किया हैं. उनके मुताबिक CBI का नया निदेशक बनाने के लिए पीएम के पास विपक्षी नेता और चीफ जस्टिस की सहमती होना जरुरी हैं. अन्यथा ऐसा करना गैर कानून हैं.

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