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शर्मनाक: जब सरकारी हस्पताल में मरीज के कटे पैर को ही बना दिया उसका तकिया..!

आज देश में सरकारी अस्पतालों की क्या हालत है इस बात को सभी भलीभांति जानते हैं. लेकिन झांसी के रानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में अमानवीयता की एक ऐसी तस्वीर सामने आई, जिसनें हर किसी की रुंह कंपा दी.

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जख्मी व्यक्ति का कटा पैर बना दिया गया उसका तकिया

दरअसल, इस सरकारी अस्पताल में डॉक्टरों ने जख्मी शख्स के कटे पैर को ही उसका तकिया बना दिया, जिसकी तस्वीर अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है. खबर है कि लहचूरा के इटायल गांव के घनश्याम राजपूत जो बस में साफ़-सफाई का काम करते हैं. उसके एक बस दुर्घटना में  दोनों पैर कुचल गए, जिसके बाद ही घायल घनश्याम को स्वास्थ्य केंद्र में प्राथमिक उपचार के बाद मेडिकल कॉलेज भेज दिया गया.

नज़ारा देख परिजन रह गये हक्का-बक्का

लेकिन वहां इतने बड़े अस्पताल के डॉक्टरों ने घायल घनश्याम के कटे पैर को ही उसका तकिया बना दिया. जी हाँ सुनने में ये बात थोड़ी संवेदनहीन लगे लेकिन ये सच है. खुद सोचिए एक इंसान जिसने अपने पैर खो दिए हो और उसी पैर पर अपना सिर रख दिया गया हो तो उसके दिल पर क्या गुजरी होगी.  हालांकि चूंकि घनश्याम उस वक्त बेहोश था इसलिए उसे कुछ पता नहीं चला, लेकिन जब मौजूद जब उसके परिवारवालों ने यह दृश्य देखा तो उनके पैरों तले जमीन ही खिसक गई.

अस्पताल प्रशासन ने कहने पर भी नहीं हटाया कटा पैर

हैरत में पड़े परिजनों ने अस्पताल प्रशासन ने कटे पैर को हटाने के लिए कहा, लेकिन उन्होंने नहीं हटाया. खबर है कि करीब दो घंटे तक जख्मी शख्स का सिर अपने ही कटे पैर पर रहा, जिसके बाद आखिकार परिवारवालों ने हिम्मत करके खुद उस कटे पैर को पीड़ित से दूर किया.

जांच के बाद दोषियों को किया गया निलंबित

मामले ने जब तूल पकड़ा तो तब कही जाकर प्रशासन की नींद उड़ी, और चिकित्सा शिक्षा मंत्री आशुतोष टंडन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दिए. जांच के बाद डॉक्टर समेत चार अस्पताल कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया. वहीं चार सदस्यीय जांच टीम भी बना दी गई.source

सरकारी अस्पतालों का यही है हाल

वाकई सरकारी अस्पतालों की इस दुर्दशा को देखते हुए ही आज गरीब सरकारी अस्पतालों में ईलाज की बजाय अपने घर बिना ईलाज मरने को तैयार है. इस लापरवाही के पीछे हम किसे जिम्मेदार मान सकते हैं प्रशासन को या लापरवाह सरकारी कर्मचारियों को.?

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