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31 किसान संगठनों ने भाजपा सरकार को घेरा, मडराने लगा 2019 पर खतरा

रायपुर। बीजेपी शासित राज्यों में किसानों की स्थिति बद से बदतर हो चुकी है। गुजरात, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ ये सभी बीजेपी शासित राज्य है और यहां किसान आंदोलन उग्र हो रहे हैं। मध्य प्रदेश में तो किसान आंदोलन कुचलने के लिए सरकार को गोली चलवानी पड़ी जिसमें 6 किसानों कि मौत हो गयी और कई अन्य घायल हो गए।

ताजा मामला छत्तीसगढ़ का जहां आज राज्य के 31 किसान संगठनों ने छत्तीसगढ़ किसान मजदूर महासंघ बनाकर 25 जिला मुख्यालय में दोपहर 12 बजे से तीन बजे तक धरना प्रदर्शन कर राजमार्गों में चक्का जाम किया। किसानों ने राजधानी रायपुर के बाहरी इलाके सेरीखेड़ी गांव के पास चक्का जाम किया, जिसमे नया रायपुर,आरंग, नवागांव, धरसींवा क्षेत्र के कई किसानों ने हिस्सा लिया।

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न्यूज एजेंसी भाषा की रिपोर्ट के मुताबिक, छत्तीसगढ़ किसान मजदूर महासंघ के संयोजक सदस्य संकेत ठाकुर का कहना है कि आज राज्य भर के किसानों ने कर्ज माफ करने, स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिश लागू करते हुए फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य कुल लागत का डेढ़ गुना घोषित करने, धान का समर्थन मूल्य 21 सौ रूपए प्रति क्विंटल करने, तीन सौ रपए प्रति क्विंटल धान पर बोनस देने, जबरिया भू-अधिग्रहण पर रोक लगाने समेत अन्य मांगों को लेकर चक्का जाम किया।

राज्य में किसानों के आंदोलन को देखते हुए आज कड़े सुरक्षा के इंतजाम किए गए थे। चक्काजाम की सूचना के बाद राजमार्गों पर बड़ी संख्या में पुलिस जवानों को तैनात किया गया था। इधर राज्य के मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने राज्य सरकार पर आरोप लगाया है कि वादा खिलाफी के कारण किसान कर्ज में हैं। कांग्रेस ने कहा है कि छत्तीसगढ़ में किसानों के साथ वादा खिलाफी की गई है। राज्य सरकार ने किसानों से धान का समर्थन मूल्य 2100 रूपये करने और तीन सौ रूपए बोनस देने का वादा किया था। लेकिन अब केंद्र और राज्य सरकार मौन है।

कांग्रेस ने किसानों की मांगों का सर्मथन करते हुए कहा है कि किसानों को बकाया बोनस एकमुश्त दिया जाए तथा धान पर समर्थन मूल्य 2100 रूपए दिया जाए। साथ ही पार्टी ने स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिश को लागू करने, किसानों का कर्जा माफ करने और पांच एचपी तक सिंचाई पंपों को नि:शुल्क बिजली देने की मांग की है।

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