मनमोहन सरकार के विकास के आकड़े देख मोदी सरकार ने अफरा-तफरी में कर डाली ये शर्मनाक हरकत!


देश के आर्थिक विकास से जुड़ी एक रिपोर्ट सामने आया जिसमे बताया गया हैं कि कांग्रेस के शासनकाल में जीडीपी की औसत दर मोदी के शासनकाल से ज्यादा थी. अहम् बात ये हैं कि यह रिपोर्ट सरकार के द्वारा समर्थित एक संस्था ने ही तैयार की है.

-रिपोर्ट ने खोली बीजेपी की पोल

इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद कांग्रेस पार्टी में ख़ुशी का लहर हैं वहीँ बीजेपी सरकार निशाने पर आ गई हैं. आपको बता दे कि सरकार इस झंझट से बचने के लिए  मिनिस्टरी ऑफ स्टेटिक्स एंड प्रोग्राम इम्पलीमेंटेशन की वेबसाइट से इस रिपोर्ट को हटा दिया है. इस वेबसाइट पर पिछले महीने में GDP ग्रोथ रिपोर्ट पब्लिश की गई थी. इसके बाद मीडिया के हाथ के ये रिपोर्ट लग गई.

– कांग्रेस ने साधा बीजेपी पर निशानाSource

इस रिपोर्ट के आधार पर कांग्रेस ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि मोदी सिर्फ और सिर्फ जूठ बोलते हैं. असल में इनका काम नहीं बोलता हैं. पैसे के बल पर जबरदस्ती प्रचार करवाया जाता हैं. इसके बाद केंद्र सरकार और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरु हो गया है. सरकार ने अपना पलड़ा झारते हुए कहा कि यह रिपोर्ट आधिकारिक रिपोर्ट नहीं हैं.

– रिपोर्ट ने किये मोदी सरकार पर सवाल खड़ेSource

बीजेपी ने वेबसाइट से रिपोर्ट हटा कर खुद फस गई हैं. अब सवाल ये उठता है की जब ये रिपोर्ट सही नहीं हैं तो फिर  \उस वेबसाइट पर कैसे पब्लिश हुआ? बीजेपी खुद सवालो के घेरे में खड़ी हो गई हैं. अब तो बीजेपी ने हद ही कर दिया रिपोर्ट सरकार द्वारा समर्थित पैनल और अर्थशास्त्री सुदीप्तो मंडल की अध्यक्षता में तैयार की गई है फिर ये रिपोर्ट गलत कैसे हो सकता हैं ? आपको याद दिला दे की 2010 – 2011 में इसी  रिपोर्ट के आधार पर बीजेपी ने कांग्रेस के पीएम डॉ. मनमोहन सरकार पर सवाल उठाई थी. उस समय GDP 10.08 प्रतिशत थी. और वर्तमान में 6.7 प्रतिशत हैं.

– रिपोर्ट में क्या लिखा है?Source

रिपोर्ट की माने तो यूपीए के 10 साल के शासनकाल में भारत का GDP 8 से 10के बीच में रहता था. आने वाले लोकसभा चुनाव में इस रिपोर्ट से बीजेपी को झटका लग सकता हैं. अर्थशास्त्रियों की माने तो आने वाले समय में GDP और गिर सकता हैं. इस रिपोर्ट के बाद देश के पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम  का तवीत सामने आया हैं जिसमे लिखा हुआ हैं कि  “जीडीपी की बैक सीरीज की गणना से यह बात साबित हो गई है कि यूपीए के 2004-2014 तक के शासनकाल में अर्थव्यवस्था के सबसे अच्छे साल रहे थे. 

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