≡ Menu



देश की दूसरी मुस्लिम महिला IPS, जिन्होंने शहीद की बेटी की ये ज़िम्मेदारी उठाकर पेश की मिसाल

भारत को दुनिया में सबसे बड़े दिल वालों का देश कहा जाता है. इसी देश में महिलाओं को देवी का अवतार भी माना जाता है. लेकिन जब यही महिलाऐं दूसरों के लिए मिसाल बनती हैं तो हर किसी को उनपर गर्व होता है.source

Like कीजिये हमारा फेसबुक पेज

देश की बेटियाँ आज बेड़ियों को तोड़कर पेश कर रही है मिसाल

बीते सालों में आज महिलाओं की स्थिति में जिस तेजी से सुधार देखने को मिला वो वाकई बेहद सराहनीय है. लेकिन आज भी देश में कोई ऐसी जगह है जहाँ कि महिलायें पुरुषों के दबाव में जीवन जीने को मजबूर हैं.source

वो महिला जो बन रही है दूसरों के लिए प्रेरणा

बावजूद इसके कुछ महिलाओं ने इन बेड़ियों को तोड़कर हमारे सामाज में ऐसी मिसाल पेश की है जिसने कई दूसरी महिलाओं को भी प्रेरणा देने का काम किया है. इसी बात को साबित करते हुए आज हम आपको एक ऐसी ही महिला के बारे में बताने जा रहे हैं, जो आज देश में इतिहास रचने का काम कर रही है.

देश की दूसरी मुस्लिम महिला IPS की प्रेरणादायक कहानी

जी हाँ आज हम आपको देश की दूसरी मुस्लिम महिला IPS अंजुम आरा के बारे मे बेहद रोचक बाते बताने जा रहे है. उत्तर प्रदेश के आज़मगढ़ जिले के एक छोटे से गाँव कम्हरिया की रहने वाली वो अंजुम आरा जिन्होंने IPS बनने का सपना देखा तो कई लोगों ने इन्हें हतोत्साहित किया, लेकिन उन्होंने अपने इस सपने को पूरा करते हुए हर किसी को हैरान कर दिया.

शहीद की बेटी की उठाई ज़िम्मेदारी

परिवार और IAS अफसर पती यूनुस खान की मदद से आज यही अंजुम जम्मू-कश्मीर में शहीद नायाब सूबेदार परमजीत सिंह की बेटी की पढ़ाई से लेकर शादी तक का पूरा ज़िम्मा उठाते हुए हर किसी के लिए एक नई मिसाल पेश कर रही है.

इस समय अंजुम सोलन जिले की SP है

अंजुम आरा के पिता एक सिविल इंजीनियर हैं और उनकी माँ हाउस वाइफ़ हैं. जानकारी के अनुसार अंजुम की शिक्षा-दीक्षा लखनऊ से हुई है. अंजुम ने कम्प्यूटर इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बाद दूसरे ही बार में IPS की परीक्षा पास कर ली थी. जिसके बाद उनकी पहली पोस्टिंग शिमला में ASP के रूप में हुई थी. इस समय अंजुम हिमांचल के सोलन जिले में बतौर SP तैनात है.

शहीद के परिवार की मदद कर पेश की मिसाल

शहीद की बेटी की ज़िम्मेदारी लेने के बाद अब अंजुम सुर्ख़ियों में है. इस बारे में जब उनसे पुछा गया तो उन्होंने बताया कि..

“शहीद की बेटी ख़ुशदीप अपने परिवार वालों के साथ ही रहना चाहती है. हम उसके घरेलू, पढ़ाई और शादी का पूरा ख़र्च उठाएँगे. जब भी हमें समय मिलेगा हम शहीद के घर जाकर उनके परिवार वालों और बेटी से मुलाक़ात भी करेंगे. उन्हें जीवन में कोई भी परेशानी ना हो, इसके लिए भी हम प्रयास करते रहेंगे. अगर वह IAS या IPS या किसी और फ़ील्ड में भी जाना चाहेगी तो हमन उसकी पूरी मदद करेंगे.”

source

बताते चले कि अंजुम के इस सरहानीय कार्य में उनके पति यूनुस भी उनके साथ है. उनका कहना है कि,

“किसी शहीद के परिवार का दर्द असहनीय होता है, लेकिन हम उनके दुःख को बाँटने की कोशिश कर सकते हैं”

{ 0 comments… add one }

Leave a Comment