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एक ऐसा मंदिर जहाँ आज भी देवी को होते है “पीरियड” और प्रशाद में भक्तों को दिया जाता है ‘खून’..

भारत केवल एक ऐसा देश है जहाँ न जाने कितने ही विचित्र प्रकार के देवी-देवताओं की पूजा की जाती है. आज ऐसी ही एक विचित्र देवी के बारे में हम आपको बतायेंगे. असम के गुवाहाटी से लगभग 9 किलोमीटर दूर नीलांचल पहाड़ी पर देवी सती का एक बेहद अनोखा व विचित्र कामाख्या मंदिर स्थित है.source

इस मंदिर को देवी केतमाम शक्तिपीठों में से बहुत खास महत्व दिया गया है क्योंकि धर्म ग्रथों के अनुसार, यहां पर देवी सती का योनिभाग गिरा था. जी हाँ शायद यही वजह है कि यहां पर देवी की मूर्ति नहीं बल्कि योनिभाग की ही पूजा होती है, जिसे हमेशा फूलों से ढ़ककर रखा जाता है. बताया जाता है की योनिभाग गिरने के कारण यहां पर मान्यता है कि यहां हर साल देवी रजस्वला होती है. source

इसका मतलब है कि जब देवी को मासिक धर्म होता है तो लोग इसे उसे अम्बुवाची पर्व के तौर पर मानते है. अम्बुवाची पर्व को अम्बुबाची पर्व भी कहा जाता है. हर साल यह पर्व जून में तिथी के अनुसार हिन्दू मान्यता को ध्यान में रखते हुए मनाया जाता है और इस बार ये पर्व 22 जून से 25 जून के दौरान मनाया जाएगा.

आखिर क्यों मनाया जाता है अंबुबाची

शास्त्रों के अनुसार माना जाता है कि इऩ दिनों में साल में एक बार कामाख्या देवी को मासिक धर्म होता है और सबसे विचित्र यहहै कि उनके श्रद्धालुओं को ये सब दिखाई भी देता है. देवी की इन दिनों योनि के रूप में पूजा की जाती है. इन दिनों ब्रह्मपुत्र नदी के पानी से लेकर कई जगह तक मां की शक्ति का खून के रंग मतलब हल्के लाल रंग में दर्शन किये जाते है. अंबुबाची को प्रकृति के उर्वरा शक्ति का प्रतीक और उसके प्रकटीकरण के तौर पर भी देखा जाता है.

देवी के मासिक धर्म के दौरान नहीं होती किसी भी घर में पूजा

देवी के मासिक धर्म के दौरान इन चार दिनों में पूरे गाँव में न तो कोई शुभ काम होता है न ही कोई नई शुरुआत की जाती है और तो और इन दिनों कामाख्या देवी मंदिर के पट बंद रहते है. न केवल इस गाँव में बल्कि पूरे असम में किसी भी घर में इन दिनों कोई भी पूजा नहीं होती. माना जाता है कि यह प्रकृति की उर्वरता की उपासना के दिन है.source

इसके साथ ही यहां पर बड़ा मेला लगता है.इसके साथ ही ये चार दिन तांत्रिकों के लिए सबसे बड़े दिन माने जाते है. पूरे देश के तंत्र साधक इन दिनों में इस पर्व में सम्मिलित होते है. तंत्र साधकों और शक्ति के गुप्त रुप के उपासकों के लिए यह सालाना कुंभ की तरह होता है. कुछ बड़े तंत्र साधक और तांत्रिक इन्हीं दिनों में सामान्य जनता को दर्शन देते है. और ऐसा हम नहीं इस बात को सिद्ध करता है ये नीचे दिया गया वीडियो. चलिए आप भी देखो

देखें वीडियो:-

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