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सर्वे रिपोर्ट: मोदी सरकार द्वारा कराई गई नोटबंदी ने तोड़े बेरोजगारी के 45 साल पुराने रिकॉर्ड!

भारत में कुछ ऐसी समस्याएं हमेशा रही हैं जिनसे जनता को अभी तक छुटकारा नहीं मिल पाया है, उनमें शामिल है, गरीबी, भुखमरी, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार. जब मोदी सरकार आई थी तो उन्होंने गरीबी और भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए जनता से वादा किया था, लेकिन भाजपा के पांच साल के कार्यकाल में बेरोजगारी घटने की बजाय और बढ़ती ही जा रही है. ऐसे ही एक सर्वे ने पूरे देश में हडकंप मचा कर रख दिया है.

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यह है पूरा मामला

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दरअसल, मोदी सरकार ने 2016 में जब नोटबंदी की घोषणा की थी तो पूरे देश में मानों तहलका सा मचा गया था. नोटबंदी के दौरान लोगों को अपने पुराने रूपये बैंक जमा करने थे उसके लिए भी एक सीमा निर्धारित थी. अगर आप पैसा निकालना चाहते थे तो आपको तय सीमा के अधीन ही पैसे मिल पाते थे. इस बीच कई शादियाँ नहीं हो पाई, कई लोगों को बिजनेस में नुकसान उठाना पड़ा और कई लोगों की नौकरी भी चली गई.

नोटबंदी में बड़ी बेरोजगारी

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जानकारी के लिए आपको बता दें, कि नोटबंदी के दौरान पैसे न मिलने की वजह से कई लोगों ने इस्तीफा दिया था, तो कई लोगों को पैसों के अभाव में नौकरी से निकाल दिया गया था. हालहि में एक सर्वे में खुलासा हुआ है कि नोटबंदी के बाद भारत में बेरोजगारी इतनी बढ़ गई है कि उसने पिछले 45 साल का रिकॉर्ड भी तोड़ दिया है. एक संस्था ने रिपोर्ट के द्वारा इस बात का खुलासा किया है कि आज बेरोजगारी का स्तर भारत में कितना नीचे गिर गया है.

ये है वो संस्था

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जिस संस्था ने ये हैरतअंगेज सर्वे करके खुलासा किया है वो नेशनल सैंपल सर्वे ऑफिस है. इस रिपोर्ट को जनता के सामने आने से रोकने के लिए भाजपा सरकार इस संस्था पर दबाव डाल रही है. बीते दिनों खबर सामने आई थी कि रिपोर्ट को पब्लिश न किये जाने की वजह से नेशनल स्टेटिस्टिकल कमीशन के दो सदस्यों ने अपना इस्तीफा भी दे दिया है.

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