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बीजेपी राज में फिर बने 1992 हिंसा जैसे हालात, अयोध्या में भक्तों ने की पूरे किले की घेराबंदी पढ़िए पूरा मामला!

आयोध्या में राम मंदिर और बाबरी मस्जिद को लेकर विवाद सालों से चला आ रहा है कोई भी सरकार इसका हल नहीं निकाल पाई है. बीजेपी ने राम मंदिर को ढाल बनाकर कई चुनावों में जीत हासिल की है और जब मंदिर के निर्माण की बात आती है तो भाजपा के नेता सवालों से बचते नजर आते हैं. बीजेपी के इस शर्मनाक खेल को अब जनता समझ चुकी है जिसको लेकर फिर बड़ा विवाद छिड़ता नजर आ रहा है.

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यह है पूरा मामलाsource

दरअसल, राम मंदिर निर्माण को लेकर कई तरफ की गतिविधियाँ देखने को मिल रही है. दंगे फ़साद होने की आशंकाओं के चलते पूरे शहर की किले बंदी हो गई. पहले ही राम की नगरी अयोध्या में बवाल होने की आशंका जताई जा रही है और राजनेता फिर भी राजनीति करने से बाज नहीं आ रहे हैं. बताया जा रहा है कि उद्धव ठाकरे रामनगरी जाने वाले हैं इसको लेकर भी सुरक्षा कड़ी कर दी गई है.

फिर बने 1992 जैसे हालातsource

आइये जानते हैं आखिर किन हालातों के बारे जिक्र किया जा रहा है. ऐसा क्या हुआ था 1992 में जिसको फिर से दौहराया जा रहा है. 25 साल पहले अयोध्या में पहुंची हिंदू कार सेवकों की लाखों की भीड़ ने विवादित ढांचे बाबरी मस्जिद को 15 मिनट में निस्तेनाबुत कर दिया था. 6 दिसंबर 1992 के उस दिन देश भर में हजारों कार सेवकों ने बाबरी मस्जिद को घेर लिया था और वहां मौजूद हजारों पुलिस वालों की निगरानी में बाबरी मस्जिद को तोड़ा गया लेकिन किसी ने उनको रोकने की हिम्मत नहीं दिखाई.

किले में बदली अयोध्याsource

जानकारी के लिए आपको बता दें, कि राम मंदिर को लेकर फिर से राम नगरी के किलेबंदी कर दी गई. इसके लिए पीएमसी की 48 कंपनी, आरएफ की 9 कंपनी, 30 एसपी, 350 उपनिरीक्षक, 175 हेड कॉन्स्टेबल, 1350 कॉन्स्टेबल, निगरानी के लिए 2 ड्रोन लगाए गए हैं. लेकिन सवाल ये उठता है कि अगर फिर से कार सेवक आ गये तो क्या ये सुरक्षा के इंतजाम काम आयेंगे कहीं फिर से पुलिस बुत बनकर तो नहीं रह जाएगी.

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