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नमाज पढ़ने को लेकर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, जिसके बाद देशभर में मचा हडकंप!

भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में हर धर्म, जाति, लिंग, के इंसान को एक समान अधिकार प्राप्त है. भारतीय संविधान के अंतर्गत अगर कोई इन अधिकारों का हनन करता है तो उसके खिलाफ कोई भी व्यक्ति सुप्रीम कोर्ट में जाकर अपील कर सकता है. मौलिक अधिकारों के लिए सुप्रीम कोर्ट अलग से कार्यवाही करती है. लेकिन हालहि में एक धर्म के लोगों को लेकर हैरान करने वाला मामला देखने को मिला है.

हर धर्म का सम्मानsource

देश में हर धर्म, उनकी संस्कृति का सम्मान किया है, लेकिन समाज में कुछ तत्व ऐसे भी हैं जो लोगों को धर्म के नाम पर मार काट करने के लिए उकसाते रहते हैं. जो लोग समझदार हैं सिर्फ वो सभी धर्म के लोगों को एक समान मानते हैं वरना लोगों के साथ धर्म जाति के नाम पर भेदभाव किया जाता है. हालहि में मुस्लिम धर्म की पुरानी नमाज पढ़ने की रिवाज पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला आया है.

सरकारी अधिग्रहण को दी गई चुनौतीsource

जानकारी के लिए आपको बता दें, कि नमाज पढ़ना मुस्लिम लोगों के जीवन का अहम हिस्सा है. 1994 में सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने कहा था कि मस्ज़िद इस्लाम का अनिवार्य हिस्सा नहीं है, इसके बाद इस्माइल फारुखी बनाम भारत सरकार मामले में अयोध्या में विवादित ज़मीन के सरकारी अधिग्रहण को चुनौती देते हुए कहा गया था कि सरकार मस्जिद की सुनिश्चित जमीन पर कब्जा नहीं कर सकती है.

नमाज के लिए मस्जिद अनिवार्य ?source

सूत्रों से पता चला है कि कोर्ट ने अधिग्रहण को कानूनन वैध ठहराया, साथ ही कहा कि नमाज तो इस्लाम का अभिन्न हिस्सा है, लेकिन इसके लिए मस्ज़िद अनिवार्य नहीं है. इस खबर के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हो रही है. इस वीडियो को देखने के बाद पूरी मुस्लिम समाज में बवाल मच गया है. उनका कहना है कि जब नमाज पढ़ने के लिए मस्जिद जरूरी नहीं है तो पूजा करने के लिए मंदिरों की क्या जरूरत है.

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