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मुस्लिम समुदाय ने मोदी सरकार को लेकर जो कहा है महागठबंधन के नेताओं को हज़म नहीं होगा !

जैसा की हम सब जानते है हमारा देश एक लोकतांत्रिक देश है. यहाँ हर धर्म के लोग अपनी मर्जी के अनुसार रहते है, काम करते है. हमारा संविधान यह इज्जाजत देता है की हर एक इंडियन  को बार बार का हक दिया गया है. लेकिन इसके बावजूद हम से कई लोग मुस्लिम धर्म को लेकर कुछ गलत फैमि पाल बैठे है. मुस्लिम धर्म कभी कांग्रेस का वोट बैंक बनता है, तो कभी बीजेपी के लिए. पर आज जो हम आंकड़े बताने जा रहे है, उससे एक बार जरुर पढ़े.

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जैसा की हम सबको पता है पहले मुस्लिम धर्म कांग्रेस का पारंपरिक वोटबैंक हुआ करता था. लेकिन जब बसपा-सपा जैसे दलों का उभार हुआ तो मुस्लिम वोट बैंक कांग्रेस से छिटक गया. जानकारी के लिए बता दे की काफी लम्बे समय से ये दोनों पार्टी मुस्लिम को वोटबैंक के लिए जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आते है, वैसे ही देश में-जैसे चुनाव नजदीक आते है, वैसे ही देश में धर्म को लेकर राजनीति शुरू हो जाती है.

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आपको बताते चलें कि साल 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान बीजेपी को लगभग 8.5 फीसदी मुस्लिम वोट पड़े. यह जानकारी एक आंकड़े से साफ हो पाया है. ऐसे में यह मुद्दा एक डिबेट का विषयबना चुका है. लेकिन क्या सच में मुस्लिम समुदाय बीजेपी को वोट देती है? वहीं दूसरी ओर बीजेपी के कई नेता कहते है कि मुसलमानों को डर दिखाकर उनका वोट हासिल करते हैं. जबकि पीएम मोदी हर भाषण में कहा करते है की बीजेपी सरकार सबका साथ सका विकास  वाली सरकार है.

आगामी चुनाव को देखते हुए पूरे देश में वोट बैंक की राजनीती शुरू हो गयी है. आज हम आपको कुछ वोटों के आंकड़ों के बारे में बताने जा रहे है. हाल में ही सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ डेवलपिंग सोसायटी ने एक खुलासा किया है कि चुनाव में राष्ट्रीय स्तर पर मुस्लिम वोटों का करीब 8.5 फीसदी बीजेपी के पक्ष में गया था. वहीं यूपी के लोकसभा चुनाव में बीजेपी खेमे में 10 फीसदी मुस्लिमों का वोट गया था. इससे पहले कभी इतना ज्यादा मुस्लिम वोट बीजेपी को नहीं मिला था.

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