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ये आंकड़े बताते हैं कि बीजेपी में परिवारवाद काफी बढ़े है, पढ़े !

जैसा की हम सबको पता है इस बार के लोकसभा चुनाव में बीजेपी पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में वापसी की है. इस प्रचंड जीत के बाद एक तरफ जहाँ बीजेपी में ख़ुशी का ठिकाना नहीं है, तो वहीं दूसरी और विरोधी पार्टी में हडकम्प मच गया है. इसका ताज़ा उद्धरण कांग्रेस पार्टी में देखने को मिल रहा है. अपनी हार के बाद कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गाँधी अपने पद से इस्तीफा दे चुके है, भले ही उनका यह इस्तीफा स्वीकार नहीं हुआ है. इस हार पर देश के पीएम मोदी समेत बीजेपी के कई बड़े, दिग्गज नेता ने चुटकी लेते हुए कहा कि इस बार लोकसभा चुनाव में परिवारवाद हार गया.

जी हां मोदी नहीं नहीं बल्कि अन्य नेता भी कांग्रेस के हार के पीछे का कारन परिवारवाद बता रहे है. हार के बाद शायद यह कहना गलत भी नहीं है की परिवारवाद की वजह से ही कांग्रेस का यह हाल हुआ है. सिर्फ कांग्रेस ही नहीं बल्कि परिवारवाद के चक्कर में कन्नौज से अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव को भी हारका सामना करना पड़ा. इतना ही है राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत के बेटेको भी हार कला सामना करना पड़ा. वही कर्नाटक की बात करे तो परिवारवाद की वजह से वहां के सीएम के बेटे हार लोकसभा चुनाव में बुरी तरह से हार गए. यह सिलसिला यही नहीं थमा, बिहार की राजनीति में लालू यादव का सिक्का चलता था, लेकिन इस बार के चुनाव में उनके बटे और बेटी का सिक्का नहीं चल पाया. इसके पीछे का कारण कुछ भी हो, लेकिन लालू यादव को भी परिवारवाद ने ले डूबा.

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इस लोकसभा चुनाव के बाद यह कहना गलत नहीं होगा कि परिवारवाद की वजह से कई दिग्गज हार गए. वही हाल में ही जारी एक रिपोर्ट की माने तो 542 में से 162 ऐसे सांसद है,जो परिवारवाद के बिच से आते है. और यह आकड़े कोई और नहीं बल्कि एक इंग्लिश अखबार ने निकला है. मतलब साफ़ है की लगभग 30 % संसाद राजनितिक परिवार से आते है. इन आकड़ो से जो नैतिक निकल कर सामने आये है, उसके बारे में हम आपको बता दे……

1. क्या क्षेत्रीय पार्टी ज्यादा वंशवादी है?

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2. किस पार्टी में परिवारवाद हैं सबसे ज्यादा ?

जानकारी के मुताबिक भारत की राजनितिक में केवल 2 ही ऐसी पार्टी है जिनमे परिवारवाद का नामो निशान नहीं हिअ, वो पार्टी कुछ इस प्रकार है- सीपीआई ,सी.पी.एम. वहीं आकड़ो की बाटे करे तो इस दोनों पार्टिओ में 5 % से भी काम परिवारवाद देखने को मिला है, वहीँ सबसे जयादा कांग्रेस में परिवारवाद भरा पड़ा है करीब 31% ,हालाँकि इस मामले में बीजेपी भी काम नहीं है, बीजेपी में 22 % परिवारवाद है. भले ही बीजेपी परिवारवाद को लेकर कांग्रेस पर हमला बोलने से पीछे नहीं है, लेकिन आकड़ो से साफ़ हैं की बीजेपी भी किसी से काम नहीं है.

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3. महिला उम्मीदवार में परिवारवाद सबसे ज्यादा है

चौकाने वाली बात यह है की महिला उम्मीदवार में परिवारवाद ज्यादा है। राजनितिक पार्टी उन्ही महिला को टिकट देती है, जिनकी प्रोफाइल राजनीति से सम्बन्ध रहती है.पार्टी को लगता है कि महिला अपने सीट से चुनाव जीत सकती है. इसका ताज़ा उद्धारहण समाज वादी पार्टी ,TDP,DMK, TRS में देखने को मिला है. इन सभी पार्टी में 100 % टिकट उन महिलाओ को दिया है, जो किसी राजनितिक पार्टी से आती है. बीजेपी ने भी उन महिलाओ को ही टिकट दिया है, जिनके पति किसी पार्टी में हो. रिपोर्ट के मुताबिक बीजेपी ने 53 % तो कांग्रेस ने 46 % टिकट उन महिलाओ को दिया है, जिनके परिवार किसी राजनीतक पार्टी से तालुकात रखते है. लेकिन इन सबके बाबजूद इस लोकसभा चुनाव में उन लोगो की हार हुई है जो परिवारवाद से तालुकात रखते है.

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