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पढ़िए सड़क पर रेहड़ी लगाने वाले की बेटी आखिर कैसे बनी IAS, कहानी सुनकर आपके रोंगटे खड़े हो जायेंगे!

इंसान अगर कुछ करने की ठान ले तो उसको वो काम करने से कोई भी नहीं रोक सकता है. लेकिन आजकल के लोगों में कुछ कर गुजरने के जोश और जुनून की कमी देखने को मिलती है. अक्सर आपने देखा होगा वही लोग सफल होते हैं जो अपने निर्णय पर अटल रहते हैं. ऐसा ही एक हैरान करने वाला मामला हालहि में सामने आया है जिसने सबके होश उड़ा कर रख दिए हैं.

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यह है पूरा मामला

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दरअसल, आज हम आपको एक IAS की ऐसी कहानी बताने वाले हैं जिसने कठिन परिस्थितियों का सामने करके अपनी मंजील प्राप्त की है. इस IAS महिला की कहानी आपको हिला कर रख देगी. इस IAS अफसर का नाम उम्मुल खेर है. आपको जानकर हैरानी होगी कि शारीरिक रूप से परेशान होने, घर के खराब हालात और अपनों के दुत्कारने से भी उम्मुल खेर ने अपने IAS बनने के सपने को मरने नहीं दिया.

राजस्थान में हुआ था उम्मुल खेर का जन्म

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जानकारी के लिए आपको बता दें, कि राजस्थान में जन्मी उम्मुल खेर एक समय में व्हीलचेयर पर रहती थी. उम्मुल का कहना था कि वह तीन भाई बहन हुआ करते थे लेकिन उनके पिता काम के लिए दिल्ली आ गये जिसके बाद उनकी माँ की हालत खराब रहने लगी. कुछ दिनों बाद उनके पिता ने सबको दिल्ली बुला लिया. वह हजरत निजामुद्दीन के पास की झुग्गियों में अपना जीवन व्यतीत करते थे.

शारीरिक दुर्बलता से जूझ कर सपना किए पूरा

आगे उम्मुल खेल ने कहा कि मुझे शारीरिक दुर्बलता के चलते अमर ज्योति कड़कड़डूमा स्कूल में दाखिला दिलाया गया जो केवल दुर्बल बच्चों के लिए था. वहां से मैंने दसवीं में कला वर्ग से स्कूल में 91 प्रतिशत से टॉप किया और इतना ही नहीं 12वीं में भी 89 प्रतिशत अंक प्राप्त कर सबसे आगे रही. हड्डियां टूटने का डर भूलकर मैं बसों में धक्के खाकर आईएएस की तैयारियां करती थी और आज मेरी मेहनत का नतीजा आपके सामने है.

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