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पिता की मौत का बदला लेने के लिए बनी थी IPS, लेकिन फिर हुआ ऐसा जिसकी उम्मीद न थी….

जिस उम्र में बच्चे खेल-कूद किया करते थे उस उम्र में मासूम किंजल अपनी मां विभा के साथ उत्तर प्रदेश के एक छोटे से शहर से दिल्ली की सुप्रीम कोर्ट की यात्रा किया करती थीं. किंजल की माँ विभा, को हालातों ने मजबूत सिंगल मदर और समर्पित पत्नी बना दिया था. उसी बहादुरी के दम पर माँ ने पति (डीएसपी केपी सिंह) की मृत्यु के बाद अपनी दोनों बेटियों को खुद पढ़ाया-लिखाया.

पति को न्याय दिलाने के लिए माँ लगाती रही सुप्रीमकोर्ट के चक्कर

पति की अचानक हुई मृत्यु के बाद विभा को जैसे-तैसे वाराणसी के ट्रेज़री में नौकरी मिली थी और वो वहीं काम करते हुए अपनी दोनों बेटियों (किंजल और प्रांजल) को शिक्षा देने के साथ-साथ पति को न्याय दिलाने के लिए कई सालों तक संघर्ष करती रही, लेकिन बावजूद इसके मृतक पति को न्याय नहीं मिल सका.

एक नकली मुठभेड़ में हुई थी पिता की मौत

सालों पहले पिता डीएसपी केपी सिंह को एक नकली मुठभेड़ में अन्य ग्रामीणों के साथ ड्यूटी पर ही मार दिया गया था. जिसको न्याय दिलाने के लिए विभा ने उत्तर प्रदेश के अपने घर से दिल्ली सुप्रीम कोर्ट तक के न जाने कितने चक्कर लगा दिए थे.

किंजल ने घर की हालत खराब होने के बाद भी दिल लगा कर मेहनत की

इसी बीच माँ की हालत देख बेटी किंजल पढ़ाई में कड़ी मेहनत करने लगी. इसी मेहनत के दम पर उन्हें दिल्ली के सम्मानित लेडी श्री राम कॉलेज में दाखिला भी मिल गया. तभी एक और त्रासदी ने दोनों बहनो को एक बार फिर अंदर तक हिला कर रख दिया.

माँ को कैंसर की खबर सुनकर टूट गई थी बहने

दोनों बहनों की जिन्दगी एक बार फिर उस वक्त बदल गई जब मां को कैंसर होने की बात सामने आई. बचपन में ही पिता को खो चुकी दोनों बेटियों के लिए ये खबर किसी सदमें से कम नही थी लेकिन बावजूद इसके दोनों ने माँ की बिमारी का हर मुमकिन इलाज कराया और खुद भी अपनी माँ के लिए आईपीएस बनने के सपने को पूरा करने के लिए और ज्यादा मेहनत करने लगी.

दोनों बहने IAS बनी तो माँ नही थी जिन्दा

आखिरकार वो दिन भी आया जब दोनों बहने IAS बन गई, लेकिन ये खबर सुनने के लिए उनकी माँ उस वक्त जीवित नहीं रही. माँ दोनों बेटियों को अपना सपना पूरा करने के लिए और पिता को न्याय दिलाने के लिए छोड़कर शान्ति से हमेशा-हमेशा के लिए सो गई थी.

एक इन्टरव्यू के दौरान बताई ये दुखद कहानी

अपने IAS बनने के बाद ये सभी जानकरी किंजल सिंह ने एक अंग्रेजी अखबार से बात करते हुए दुनिया से सांझा की तो संघर्ष की ये कहानी सुनकर मानो हर किसी की आँखे नम हो गई.

किंजल सिंह ने अपने इसी इन्टरव्यू में बताया कि पिता के.पी. सिंह एक आईएएस अधिकारी बनने चाहते थे, लेकिन उनकी मौत के बाद उनकी माँ ने उनका सपना अपनी बेटियों को आईएस बनाकर पूरा किया.

दोनों बहनों ने साथ की यूपीएससी परीक्षा पास

कॉलेज में अंतिम परीक्षा देने से ठीक पहले माँ की मृत्यु हुई थी. जिसके बाद पढ़ाई पूरी होने के तुरंत बाद, वो अपनी छोटी बहन, प्रांजल सिंह को भी अपने साथ दिल्ली ले आईं. बहन के साथ रहते हुए ही उन्होंने यूपीएससी परीक्षा की तैयारी पर अपना ध्यान केंद्रित किया. 2007 में दोनों ने ही यूपीएससी परीक्षा पास कर ली. इस परीक्षा में किंजल को 25वीं रैंक हासिल हुई और प्रांजल को 252वीं रैंक. आखिरकार दोनों बहनों की सालों पुरानी मेहनत रंग लाई.

अफ़सर बनकर पिता को दिलाया 31 साल बाद न्याय

अफ़सर बनते ही किंजल और प्रांजल ने माँ और पिता का आखिरी सपना, जो था अपने पिता के हत्यारों की गिरफ्तारी करना उसके लिए मेहनत करनी शुरू की. इसी कड़ी में आखिरकार उनके पक्ष में एक बड़ा फैसला आया. जिसमें 2013 में संघर्ष के 31 साल बाद लखनऊ में की विशेष अदालत ने उनके पिता डीएसपी केपी सिंह की हत्या के सभी अपराधियों को दंडित किया.

फ़ैसला सुन किंजल उस समय ख़ामोश थी लेकिन जब उन्होंने इस अंग्रेजी अखबार को अपना इंटरव्यू दिया तो उनके जीवन के संघर्षों और बाधाओं की कहानी साफ़ तौर पर दुनिया ने सुनी. आज दोनों बहने देश के प्रति समर्पित व देश की ईमानदार अफ़सर है.

नोट: दोस्तों आपको इन बहनों के संघर्ष की ये कहानी कैसी लगी? हमे नीचे कमेंट कर जरुर बताएं और पसंद आए तो इसे शेयर भी करे.

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