भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरु के निधन पर भाषण देकर रो पड़े थे वाजपेयी!


भारत को आजादी कई वर्षो के बाद मिली थी, जब भारत आजाद हुआ था तो देश के पहले पीएम पंडित जवाहरलाल नेहरु ने कई हैरान करने वाली काम किये. उनके कामों से भारत के विकास की गति में तेजी देखने को मिली थी. नेहरु को बच्चों से बहुत प्यार था. लेकिन सन 27 मई 1964 नेहरु ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया था. लेकिन उनको लेकर एक खबर तेजी से वायरल हो रही है.

यह है पूरा मामलाsource

जब नेहरु का देहांत हुआ था तो पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी ने सांसद में ऐसा भाषण दिया था कि पूरा देश उस भाषण को सुनकर रोया था. लेकिन जब वाजपेयी का देहांत हुआ है तो उनके निधन पर भी उन्हीं का वो भाषण प्रासंगिक हो गया है. वाजपेयी ने नेहरु के लिए ऐसी लाइनों का इस्तेमाल किया जिनको सुनकर किसी पत्थर दिल इन्सान की आँखों में भी पानी आ जाये.

यह है था भाषणsource

आइये आपको बताते हैं आखिर हम किस भाषण की बात कर रहे हैं. “एक गीत अब गूंगा हो गया. जलती हुई लौ अनंत में विलीन हो गई. सपना था, एक ऐसे संसार का जो भय और भूख से रहित हो. गीत था ऐसे महाकाव्य का, जिसमें गीता की गूंज और गुलाब की गंध थी. दीपक की वो लौ जो रात भर लड़ता रहा, रात भर जलता रहा, हर अंधेरे से लड़ता रहा और हमें रास्ता दिखा कर एक प्रभात में निर्वाण को प्राप्त हो गया.”

नेहरु जैसी सज्जनता प्राप्त करनी हैsource

आगे वाजपेयी ने कहा था कि एक तारा टूट गया है, नेहरु की विपक्षियों को साथ लेकर चलने की वो भावना, वो महानता, वो सज्जनता, शायद ही आने वाली राजनीति में देखने को मिले. मैं उनके जैसी सज्जनता प्राप्त करना चाहता हूँ. राजनीतिक मतभेदों के बावजूद मेरे हृदय में पंडित नेहरु के प्रति आदर के अतिरिक्त कुछ भी नहीं है.

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